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हमेशा के लिए बेशुमार : मां काप्यार

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मातृत्व कोई रिश्ता नहीं है मातृत्व कोई तजुर्बा भी नहीं है यहां तक कि यह कोई प्यार का साकार रूप भी नहीं है मातृत्व अपने बच्चों की कामयाबी, उपलब्धि, बदलाव और यहां तक कि उनकी परेशानियों संग जीने का एक खास एहसास है। और साथ ही यह महज इंसानों तक सीमित नहीं है। मातृत्व एक ऐसा एहसास है जो पूरी दुनिया के तौर पर और पूरी दुनिया भर में काम करता है। एक मां ही वह शख्स है जो हरदम यानी 24*7 काम करती है और बदले में कभी भी कुछ नहीं मांगती। क्या आपने कभी सोचा है कि वह कितनी ताकतवर है। उसकी ताकत आपमें छिपी है। एक मां के लिए, उसके बच्चे के चेहरे की मुस्कान ही उसकी पूरी दुनिया है। वह बिना किसी शर्त के प्यार करती है। एक मां ही वह शख्स है जो यह देखकर कि चार लोगों के लिए महज तीन पकवान हैं, फटाफट यह कह देती है कि उसके दांत में दर्द है और वह बिल्कुल भी मीठा नहीं खा सकती। खुद को कोई भी मां-बाप कहलवा सकता है मगर सिर्फ एक मां ही, खुद की जरूरतों व चाहतों से भी ऊपर अपने बच्चों को रखती है। एक मां ही वह शख्स है जो अपने बच्चों का झूठा भोजन जोकि पहले से ही चबाया हुआ है, खाकर अपना पेट भर लेती है।...

दूसरी बार प्यार

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     ट्रेन की भीड़-भाद मे अनिल चुप-चाप किसी बेजान मूर्ति की तरह सूरत से अहमदावाद जा रहा था। अपने 4 गंटे के सफर मे किसीसे कोई बात नही की थी। अनिल जब स्टेशन पर उटरा तो सबसे पहले उसकी नज़र दीवार पे लगे डिस्प्ले बोर्ड पर पड़ी जिसमे लिखा था की "अहमदावाद मे आपका स्वागत है।" एक लंबी सांस लेके अनिल ने सारा सामान अपने हाथो से उठा लिया ओर रेलवे-स्टेशन से बाहर आने लगा। नई जगह पे आने का ओर नई कॉलेज मे अड्मिशन की उसके चेहरे पे कोई खुशी नही थी। सायद उसकी उदासी की वज़ह अंजलि थी वही लड़की जो उसके साथ सूरत मे पढती थी। वोही लड़की जिसे वो बेशूमार प्यार करता था। अनिल से अपना बोज नही सम्भला जा रहा था उसके एक बैग मे उसका सपना था मैकेनिकल इंजिनियर बनके ऑटोमेशन प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी मे क्रांति लाने का सपना इसी लिए तो घर से इतने दुर अहमदावाद आया था देश के सबसे अच्छे इंजिनीअरिंग कॉलेज मे से एक एल.दी.कॉलेज मे। उसके ओर एक बैग मे उसके सारे कपड़े ओर जरूरी सामान था इन बैग का बोज तो वो उठा लेता पर ये तीसरा बैग तो कुछ ज्यादा ही भारी था उसमे अंजलि की यादे जो भरी थी। उसके उस नासमज, अनुभवहीन ओर बहोत ही मुला...

आखरी खत

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            वैसे तो कई खत लिखे गए होंगे जो पते तक कभी पहोंचे ही नही। बीच मे ही कही अटके पड़े होंगे जैसे उस साम की तरह जिसे ना दिन अपनाता है और ना रात बस वैसा ही ये खत है। इस खत की तरह ही था हमारा प्यार भी युहि जनम ले लिया था उसने। बसंत के फूल चुने थे हमने साथ,सावन की ज़दि ने साथ मे भिगोया था,गर्मी की लू के थपेड़ो से अपने आँचल मे छुपाया था। रात को आमद होती है तुम्हारे ख्वाबो की तो यकीन मानो जाती हुई तुम्हारी रातो से हर रोज़ वादा ले लेता हु की फिर मत आना पर है तो तुम्हारे ख्वाब तुम्हारी तरह वादा तोड़ने की पुरानी आदत है इनकी।             प्यार करना सायद मुजे कभी आया ही नही। तुम जिसे प्यार कहते हो वो प्यार हुआ ही नही जीवन मे। एहसासों के दम भरते आसमान मे बहोत छोटा रेह गया मेरा प्यार। जमीन पर ही एक पूर्ण समर्पित और सम्पूर्णता के दरिया मे बहने वाला प्यार। उस दरिया मे बेहते बेहते उसके दायरे कब सामने आके खड़े हो गए पता ही नही चला। लौटना भी मुश्किल था और इतने बड़े दायरे पार करना भी कठिन। उन दाइरो मे रेहके भी तुमसे कितना प्यार कर...

बॉलीवुड के ये 50 रोमेंटिक डायलॉग्स बताएंगे आपको प्यार का सही मतलब

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“HAR ISHQ KA EK WAKT HOTA HAI. WOH HAMARA WAQT NAHI THA, PAR ISKA YEH MATLAB NAHI KI WOH ISHQ NAHI THA ” -JAB TAK HAI JAAN “KOI PYAAR KARE TUMSE KARE, TUM JAISE HO WAISE KARE. TUMSE BADAL KAR JO PYAR KARE, WO PYAAR NAHIN SAUDA HAI AUR SAHIBA PYAAR MAIN SAUDA NAHIN HOTA.” -MOHABBATEIN “JAB KOI PYAAR ME HOTA HAI TO KOI SAHI GALAT NAHI HOTA.” -JAB WE MET “ISHQ DE MERE MITRA PEHCHAAN KI, NIT JAAVE JADOON ZID APNAN DI. ASLI PYAR KA MATLAB HAASIL KARNA NAHI HOTA.” -NAMASTE LONDON “MOHABBAT BHI ZINDAGI KI  TARAH HOTI HAI. HAR MOD AASAN NAHI HOTA, HAR MOD PAR KHUSHI NAHI HOTI. PAR JAB HUM ZINDAGI KA SAATH NAHI CHHODTE, PHIR MOHABBAT KA SAATH KYUN CHHODEIN?” -MOHABBATEIN “TERE DIL MAIN MERI SAANSON  KO PANAH MIL JAYE, TERE ISHQ MEIN MERI JAAN  FANAA HO JAYE.” -FANAA “ITNI SHIDDAT SE MAINE TUMHE  PAANE KI KOSHISH KI HAI, KI HAR ZARRE NE MUJHE TUMSE MILANE KI SAAZISH KI HAI.” -OM SHANTI OM “AGAR TUM MUJHE YUN HI  DEKHTE RAHOGE,...